प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: [email protected]

रिपोर्ट · 23 July 2026

हवा की यह शांति मौसम का उधार है, सरकार की नीति नहीं।

आज ऊपरी तौर पर दिल्ली का औसत AQI 75 दिखता है, मगर मौसम का हिस्सा हटाते ही यह 100 पर पहुँच जाता है, यानी हक़ीक़त में इससे भी ख़राब।

+22.5
एक्यूआई अंक पिछले साल से बदतर
PM10 मौसम का असर हटाकर
6 / 6
बिना सुधार वाले प्रदूषक
आज मापे गए प्रदूषकों में से
151
सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
R K Puram, मध्यम
विश्लेषण की अवधि: 22 जुलाई सुबह 10 बजे से 23 जुलाई सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 16 जुलाई से 30 जुलाई 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 0.6 MB
हिंदी में। अवधि 118 सेकंड।

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

What de-weathering means
‘मौसम का असर हटाना’ यानी de-weathering का मतलब यह है, कि आँकड़ों में से हवा, बारिश और तापमान का हिस्सा हम गणित की मदद से अलग कर देते हैं। बारिश और तेज़ हवा प्रदूषण को धो या बहा ले जाती है, जबकि थमा हुआ मौसम उसे वहीं रोके रखता है, इसीलिए किसी एक दिन की हवा महज़ मौसम के कारण अच्छी या बुरी दिख सकती है। यह मौसमी हिस्सा निकाल देने के बाद जो बाक़ी रहता है, वही शहर का अपना, असली प्रदूषण है, और वही 55 दिन से लगातार ऊपर बना हुआ है।
मौसम का हिस्सा निकाल देने के बाद भी दिल्ली के सभी 30 मिलान स्टेशन पिछले साल से बदतर हैं, औसतन 24 AQI अंक ऊपर। यह बढ़ोतरी पूरे शहर में फैली है, कहीं कोई छूट नहीं।
Pollutant detail
मौसम का हिस्सा अलग कर देने पर PM two point five पिछले साल से 38 percent ऊपर ठहरता है, यह बढ़त नीति की नाकामी है, मौसम की नहीं।
आज की सबसे अहम बात यही है, कि मौसम का असर पूरी तरह निकाल देने के बाद भी दिल्ली का अपना PM ten लगातार 55 दिन से पिछले साल के ठीक इन्हीं दिनों के मुक़ाबले ऊपर टिका हुआ है। पूरे 55 दिन, मई से लेकर आज तक, एक भी दिन यह पिछले साल के स्तर से नीचे नहीं उतरा। मौसम का हिस्सा हटा देने के बावजूद यह बिगड़ाव क़ायम रहता है। यह लगातार चलता, टिकाऊ बिगड़ाव है, और यही आज की असली कहानी है।
Against the WHO standard
दिल्ली के 42 में से 37 स्टेशन PM two point five की WHO सीमा के पार हैं, और 44 में से 37 स्टेशन PM ten की WHO सीमा के ऊपर हैं।
What it does to health
University of Chicago के Air Quality Life Index के मुताबिक़, दिल्ली की ख़राब हवा हर इंसान की ज़िंदगी से कई बरस कम कर देती है।
What we are asking for
सरकार से तीन माँगें। पहली, PM ten के स्रोतों यानी निर्माण-धूल और सड़क-धूल, और PM two point five के स्रोतों यानी उद्योग, वाहन और बायोमास-दहन, दोनों पर बिना देर किए सख़्ती हो। दूसरी, मौसम-मुक्त PM ten में सबसे ख़राब Wazirpur का इलाक़ा, जहाँ PM ten 144.2 micrograms यानी WHO सीमा से 3.2 गुना ऊपर है, और मौसम-मुक्त हवा पिछले साल से 1 अंक और बिगड़ी है, वहाँ स्थानीय स्रोतों पर फ़ौरन कार्रवाई और स्वास्थ्य-चेतावनी हो। तीसरी, AQI के लक्ष्य WHO मानकों की ओर और कठोर किए जाएँ।
Worst station
सबसे बुरी हालत Wazirpur की है, मौसम का हिस्सा निकाल देने पर वहाँ AQI 130 और PM ten 144.2 micrograms, यानी WHO सीमा से 3.2 गुना ऊपर।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैस आँकड़ों — ख़ासकर NO2 — में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं — इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।

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