प्रकाशक श्री अजय माकन, Member of Parliament, Rajya Sabha. सीपीसीबी के सरकारी आँकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण। आँकड़ों का संकलन CREA द्वारा। जागरूकता के उसके प्रयासों के लिए हमारा आभार। इस साइट में CREA की कोई भागीदारी नहीं है। संपर्क: [email protected]

रिपोर्ट · 11 September 2026

सुई चढ़ती रही, और नीति वहीं की वहीं खड़ी रही।

आज दिल्ली का औसत AQI 124 है, और मौसम का असर हटाने पर भी इसमें कोई सुधार नहीं दिखता।

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सबसे ख़राब स्टेशन पर एक्यूआई
Wazirpur

आज के कार्ड

गिनतीसबसे ख़राब स्टेशनचार किलोमीटर के दायरे के लोगस्टेशनों का फैलावआख़िरी कार्डचौड़ा कार्ड

आज इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप पर यही कार्ड गए। पूरा देखने के लिए किसी एक पर टैप कीजिए।

विश्लेषण की अवधि: 10 सितंबर सुबह 10 बजे से 11 सितंबर सुबह 10 बजे तक
तुलना का आधार: 4 सितंबर से 18 सितंबर 2025

आज की पूरी रिपोर्ट

लगभग बारह पन्ने: आज की हवा का फ़ैसला, हर निगरानी स्टेशन, मौसम बनाम नीति का हिसाब, पूरे साल का मौसम-मुक्त रुझान, और हर आँकड़े के पीछे के अनुबंध।

रोज़ की रिपोर्ट डाउनलोड करेंPDF, 4.1 MB

निष्कर्ष

आज की रिपोर्ट क्या कहती है

इस साल के 253 दिनों को सबसे साफ़ हवा से सबसे गंदी हवा तक एक क़तार में खड़ा कीजिए। हर दिन का आँकड़ा CPCB के अपने स्टेशनों का दर्ज किया हुआ AQI है, मौसम हटाए बिना, यानी जैसा मापा गया, वैसा ही। अब इस क़तार को तीन जगह देखिए, शुरू में, बीच में और आख़िर में। और हर जगह पिछले साल की इन्हीं तारीखों से मिलाइए। पहले क़तार का पहला चौथाई हिस्सा, यानी साल के सबसे साफ़ 63 दिन। पिछले साल इन दिनों की हवा AQI 90 तक रही, इस साल AQI 108 तक। जो दिन सबसे साफ़ थे, वे भी मैले हो गए। फिर क़तार का ठीक बीच वाला दिन। उससे पहले के आधे दिन कम गंदे, उसके बाद के आधे दिन ज़्यादा गंदे। पिछले साल वह दिन AQI 140 पर था, इस साल AQI 154 पर। और क़तार का आख़िरी दसवाँ हिस्सा, यानी साल के सबसे ज़हरीले 25 दिन। पिछले साल ये AQI 289 से ऊपर थे, इस साल AQI 299 से ऊपर। हाँ, AQI 200 या उससे नीचे वाले दिन 174 दिन से बढ़कर 175 दिन ज़रूर हुए। पर क़तार के एक सिरे से दूसरे सिरे तक, साल के किसी भी हिस्से की हवा साफ़ नहीं हुई।

एक सावधानी, जो हम रोज़ छापते हैं

गैस आँकड़ों, ख़ासकर NO2, में अंतरराष्ट्रीय शोध ने इकाई-संबंधी गड़बड़ियाँ पाई हैं; PM2.5 और PM10 भरोसेमंद हैं, इसलिए आज का आकलन इन्हीं पर केंद्रित है।

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